हम जो भी Waaree पैनल देते हैं, वह दो तरह का आता है: DCR और Non-DCR। गलत चुनाव से घर वाले की सब्सिडी छूट सकती है, या फ़ैक्टरी को ज़रूरत से ज़्यादा पैसे देने पड़ सकते हैं। आपको कौन-सा चाहिए, यह ऐसे पहचानें।
DCR का असली मतलब
DCR का पूरा नाम Domestic Content Requirement (घरेलू सामग्री की शर्त) है। DCR पैनल भारत में बने सोलर सेल से बनता है, और मॉड्यूल भी भारत में ही असेंबल होता है। Non-DCR पैनल में आयात किए गए सेल लगते हैं, हालाँकि मॉड्यूल फिर भी यहीं बन सकता है। Waaree के मॉड्यूल यहीं बनते हैं।
यह इस बात का नियम है कि सामग्री कहाँ से आई, क्वालिटी का दर्जा नहीं। दोनों की टेस्टिंग एक जैसी होती है और दोनों पर निर्माता की वारंटी मिलती है। DCR से बस यह तय होता है कि सिस्टम को सरकारी सहायता मिलेगी या नहीं।
झटपट जवाब
| आप हैं | चुनें | क्यों |
|---|---|---|
| घर, लगभग 6 kW तक | DCR | पीएम सूर्य घर की सहायता DCR पैनलों की अतिरिक्त लागत से ज़्यादा है। |
| घर, लगभग 7 kW | कोई भी | सब्सिडी और DCR का अतिरिक्त दाम लगभग बराबर हो जाते हैं। हम दोनों का दाम बताते हैं। |
| घर, लगभग 8 kW से ज़्यादा | आमतौर पर Non-DCR | सब्सिडी 3 kW पर बढ़ना बंद हो जाती है, लेकिन DCR का अतिरिक्त दाम आप हर kW पर देते हैं। |
| हाउसिंग सोसाइटी (कॉमन एरिया) | DCR | 500 kW तक हर kW पर सहायता मिलती है, इसलिए किसी भी साइज़ में DCR ही फ़ायदेमंद है। |
| दुकान, मॉल, होटल, अस्पताल या फ़ैक्टरी | Non-DCR | सब्सिडी नहीं मिलती, इसलिए DCR के लिए ज़्यादा पैसे देने का कोई फ़ायदा नहीं। |
| सरकारी फ़ंड वाला प्रोजेक्ट | DCR | यह आमतौर पर अनिवार्य होता है। |
घरों के लिए साइज़ के साथ जवाब क्यों बदलता है
DCR पैनल प्रति वॉट Non-DCR से महंगे होते हैं, और यह फ़र्क आप लगाए गए हर kW पर देते हैं। दूसरी ओर, पीएम सूर्य घर की सहायता पहले 3 kW तक बढ़ती है और फिर वहीं रुक जाती है।
छोटे प्लांट पर सब्सिडी DCR की अतिरिक्त लागत आसानी से पूरी कर देती है। प्लांट जितना बड़ा होता है, अतिरिक्त लागत उतनी बढ़ती जाती है, पर सब्सिडी नहीं बढ़ती। लगभग 7 kW पर दोनों बराबर हो जाते हैं। उससे ऊपर, बिना सब्सिडी के भी Non-DCR सिस्टम आमतौर पर ज़्यादा फ़ायदेमंद रहता है।
मॉड्यूल के दाम बदलते ही यह बराबरी का बिंदु भी खिसक जाता है, इसीलिए 6 से 9 kW वाले हर घर के लिए हम दोनों विकल्प साथ-साथ दिखाते हैं।
दो नियम जिनमें लोग अक्सर चूकते हैं
दोनों को मिला नहीं सकते। सब्सिडी वाला सिस्टम शुरू से आखिर तक DCR होना चाहिए। DCR प्लांट में कुछ Non-DCR पैनल जोड़ने से पूरा सिस्टम अयोग्य हो जाता है।
DCR ऐरे को ज़रूरत से बड़ा न करें। सब्सिडी सैंक्शन क्षमता पर तय होती है, लेकिन DCR का अतिरिक्त दाम लगाए गए हर वॉट पर देना पड़ता है। सैंक्शन kW से ज़्यादा पैनल चुपचाप आपका फ़ायदा घटा देते हैं। हम DCR ऐरे को सैंक्शन आँकड़े के करीब ही रखते हैं, और ज़्यादा साइज़ सिर्फ़ Non-DCR प्लांट में रखते हैं।
प्रति वर्ग फ़ुट पावर का क्या?
सालों तक DCR पैनल ज़्यादातर पुरानी P-type PERC तकनीक के थे, जबकि Non-DCR पैनल N-Type TOPCon पर आ गए, जिससे उतनी ही छत पर ज़्यादा पावर मिलती है। अब यह फ़र्क घट रहा है, क्योंकि Waaree अब DCR TOPCon मॉड्यूल भी बनाता है। फिर भी कम जगह वाली छत पर यह देखना ज़रूरी है कि कौन-से मॉडल सबसे अच्छे बैठते हैं, और यह हम सर्वे के दौरान करते हैं।
हमारी सलाह
अगर आपका घर है और प्लांट 6 kW से कम है, तो DCR चुनें और सब्सिडी क्लेम करें। अगर आपका व्यवसाय है, तो Non-DCR चुनें। अगर आप बीच में कहीं हैं, तो हमसे दोनों का दाम निकलवाएँ। इसमें कुछ ही मिनट लगते हैं, और ईमानदारी से जवाब देने का यही एक तरीका है। अभी पहला जवाब चाहिए, तो हमारे सब्सिडी पेज पर एक झटपट DCR या Non-DCR चेकर है।
झटपट जवाब
क्या DCR की क्वालिटी Non-DCR से बेहतर है?
नहीं। DCR बताता है कि सोलर सेल कहाँ बने हैं, उनकी क्वालिटी नहीं। दोनों पर निर्माता की वारंटी मिलती है।
क्या Non-DCR पैनल पर पीएम सूर्य घर सब्सिडी मिल सकती है?
नहीं। सब्सिडी के लिए भारतीय सेल से बने DCR मॉड्यूल ज़रूरी हैं।
क्या फ़ैक्टरी को DCR पैनल खरीदने चाहिए?
आमतौर पर नहीं। व्यवसायों को सब्सिडी नहीं मिलती, इसलिए Non-DCR पैनल DCR के अतिरिक्त दाम के बिना उतनी ही या ज़्यादा पावर देते हैं।